कानोड़ । प्रभु दुःख में तुम हमारे साथ रहो कमलेश भाई शास्त्री
कानोड़ । राजमहल के प्रांगण में आज तीसरे दिन राम कथा के श्रवण के पूर्व राम कीर्तन कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के पूर्व सुख-दुख को परिभाषित करते हुए कथावाचक कमलेश भाई शास्त्री ने बताया कि जीवन में सत्य का उद्घाटन नहीं होता। मनुष्य जन्म जन्म तक सत्य को खोजता रहता है। इस संदर्भ में कई प्रसंग सुनाते हुए तुलसीदास ने कहा कि, सब जगह दुख ही दुख है। किसी को उचित मान- सम्मान नहीं मिलता तो दुख:, व्यवसाय अच्छा नहीं चलता है तो दुख:, बेटा नहीं है तो दुख:, तुलसी कहते हैं "जो देखा सब दुखिया, बाबा सुखिया कोई नहीं।"
कृष्ण व कुंती संवाद में कुंती ने जब भगवान से दुख मांगा तो कुंती कहती है भगवान दुख में पांडव के साथ रहे इसलिए हमें तो दुख: ही चाहिए। तो हनुमान ने कहा है कि विपत्ति एक ही है जब तब सुमिरन भजन नहीं हुए तब तक दुख होय। कमलेश भाई ने बताया कि स्वयं भगवान राम को भी जीवन में अनेक दुख आए हैं। इसलिए राम का जीवन पढ़ना चाहिए। राम-राम रटने से दुख जाएगा नहीं बल्कि दुख में भगवान को याद करने से उर्जा व साहस मिलेगा।
पूर्व जन्म में दुख आपके साथ इस जीवन में भी रहेंगे ।कथा के दौरान कई राग रागिनी द्वारा कबीर के पद मालकोश में सुनाया" मन लागो यार फकीरी में जो सुख हरि भजन में वह सुख नहीं अमीरी में" गाकर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया कृष्ण ने अर्जुन को सुख दुख की परिभाषा बताते हुए कहा कि जैसे सर्दी में गर्मी अच्छी लगती है और गर्मी में ठंडक अच्छी लगती है उसी तरह सुख और दुख को परिभाषित किया।
रेिपोर्ट - शम्भू लाल दमामी


