कानोड़ । भाई ने भाई के लिए छोड़ा है छीना नहीं है - शास्त्री
कानोड़ । राजमल प्रांगण में आयोजित श्री राम कथा के दौरान त्याग की महिमा का बखान करते हुए कथावाचक कमलेश भाई शास्त्री ने बताया कि भाई ने भाई के लिए छोड़ा है छीना नहीं। त्याग का मतलब छोड़ना नहीं, जैसे भोजन छोड़ना,वस्तु छोड़ना,घर छोड़ना आदि त्याग का मतलब भाग जाना है। जबकि कलयुग में हमें जागना है त्यागी हमें वैरागी और अनुरागी बनाता है।
गीता का प्रसंग सुनाते हुए कृष्ण ने भी बताया कि ऋषि कहते हैं कि जो लोगों के लिए दिन है वह ऋषि के लिए रात है। और जो रात हैं वह ऋषि के लिए दिन है। शास्त्री ने कथा में कहा है कि हम कथा में तो जाग जाते हैं, पर घर जाने पर पुनः माया जाल में फंस जाते हैं। धर्म में आने के लिए घर छोड़ना जरूरी नहीं है, कई संतों का उदाहरण देते हुए कहा है कि गृहस्थी होते हुए भी उन्होंने धर्म व समाज का काम किया। संत नरसी मेहता, मीराबाई, तुकाराम ,ऐसे कई ऋषि हुए हैं।
कथा के दौरान भरत दास जी वह याज्ञवल्क्य का प्रसंग सुनाते हुए शिव सती को राम कथा सुनाएं त्रेता युग को याद कराते हुए राम कथा सुनने से पहले शिव कथा सुननी जरूरी है। तभी राम कथा में प्रवेश कर सकते हैं।उसमें शिव सती का मार्मिक वर्णन किया गया। सती द्वारा भगवान राम की परीक्षा का जिक्र भी किया। सती को आग्रह किया कि परीक्षा लेने के लिए विवेक होना जरूरी है।
ऐसे कई प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को बांधे रखा तथा चौपाइयों के द्वारा संगीत में कथा सुनाई। राम द्वारा माता सीता के अपहरण के बाद राम वन वन भटकते हैं और वह पत्तों से वृक्षों से सीता का पता पूछते हैं। गीत के माध्यम से दर-दर की खाक छानी निर् पानी पत्तों से पूछते हैं उनको पता ठिकाना। सीता के खोने का मार्मिक वर्णन कथा में किया गया इस दौरान बड़ी सादड़ी के पीठाधीशा महंत भी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट - शम्भू लाल दमामी



