बांझपन का कारण- सैनिटरी नैपकिन न इस्तेमाल करना
भारत की पूरी जनसंख्या में से 48.5% महिलाएं है और सैनिटरी नैपकिन हर महिला की आवश्यकता है। लेकिन गौर किया जाए तो पता चलता है कि बस 18% महिलाएं ही सैनिटरी नैपकिन का उपयोग कर पाती है, और बाकी अभी भी घास, चारा, राख का उपयोग करती हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है।
दुष्प्रभावों के कारण, लगभग 5% महिलाओं को बांझपन का सामना करना पड़ता है। पीरियड्स के दौरान बैक्टीरिया बहुत जल्दी पनपते है और बच्चेदानी और रक्त नसों के माध्यम से बैक्टीरिया अंडाशय तक पहुंच जाता है जो संक्रमण फैलाता है। इस संक्रमण के कारण, कई बार बच्चेदानी को हटाया जाना पड़ सकता है।
गत वर्ष सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी के अन्तर्गत लक्जरी वस्तु का वर्गीकरण कर 12% जीएसटी लगाया गया था जिसकी बहुत निंदा की गई। 28 वीं जीएसटी की बैठक में शनिवार को कई उत्पादों पर जीइसटी कटौती को मंजूरी दे दी गई जिसमें सैनिटरी नैपकिन पर जीएसटी शून्य हो गया है। यह परिषद द्वारा एक बहुत ही उल्लेखनीय कदम है क्यूंकि सैनिटरी नैपकिन हर महिला की जरूरत है।

